Wednesday, 6 August 2014

अनामिका


माझ्याच कवितेला मीच त्रयस्थपणे पाहिल्यानंतर सुचलेले हे विचार..
शीर्षक काय देऊ? कविता? कल्पना? की प्रतिभा?
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शब्द शब्द गुंफूनी
हे काव्य कैसे प्रसवले?
भाव माझे शब्द तुझे
एक कैसे जाहले?

 
स्पंदने माझ्या मनाची
तू कशी ग जाणीली?
हाक माझ्या अंतरीची
तू कशी हुंकारीली?

तू सखी तू..?
तू परी तू..?
की भुलवी मजला आसरा..!

तू खरी तू..?
वसशी कुठे तू...?
की फक्त माझी कल्पना..!

-कल्याणी (निकिता)