Monday, 4 August 2014

यादे

तेरी याद मे सुबेह शाम पिता हू..
गम के प्यालो को मय के घुंट समझ कर..
गर्दीश मे चढता है मुझे नशा तेरी यादोंका...
जिता हू उसिमे ख्वाबोकी दुनिया बनाकर..